हल्दी, मेहंदी और सात फेरे: समझें शादी की हर रस्म का गहरा अर्थ

हल्दी, मेहंदी और सात फेरे: समझें शादी की हर रस्म का गहरा अर्थ

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शादी में कई रस्में होती हैं, जिन्हें हम बड़े प्यार और उत्साह के साथ निभाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन रस्मों का सिर्फ रीतिरिवाज़ ही नहीं, बल्कि एक गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक अर्थ भी है?

1. हल्दी की रस्म (पीठी):

  • दिखावट: हल्दी, चंदन और तेल का उबटन लगाया जाता है।

  • अर्थ: हल्दी एक एंटीसेप्टिक और त्वचा को निखारने वाली होती है। शादी के पहले की व्यस्तता में यह शरीर को तरोताजा करती है। आध्यात्मिक रूप से, यह शुभता और सफलता का प्रतीक है।

2. मेहंदी रचना:

  • दिखावट: दुल्हन के हाथ-पैरों में मेहंदी सजाई जाती है।

  • अर्थ: मेहंदी को ठंडक पहुंचाने वाली माना जाता है। शादी के पहले होने वाले तनाव और उत्सुकता को कम करने में यह मदद करती है। कहा जाता है कि दुल्हन की मेहंदी जितनी गहरी होगी, उसका रिश्ता उतना ही मजबूत होगा।

3. सात फेरे (सप्तपदी):

  • दिखावट: अग्नि को साक्षी मानकर दूल्हा-दुल्हन सात फेरे लेते हैं।

  • अर्थ: यह शादी की सबसे महत्वपूर्ण रस्म है। हर फेरे का एक वचन होता है जो दोनों एक-दूसरे को देते हैं। ये सात फेरे जीवन के सात वचनों का प्रतीक हैं - सम्मान, प्रेम, स्वास्थ्य, समृद्धि, धर्म, संतान और आजीवन साथ।

4. कन्यादान:

  • दिखावट: दुल्हन के पिता अपनी बेटी का हाथ दूल्हे के हाथ में सौंपते हैं।

  • अर्थ: यह एक भावनात्मक क्षण होता है। इसका अर्थ है विश्वास और एक नए रिश्ते की शुरुआत। यह दर्शाता है कि अब दूल्हा दुल्हन की देखभाल और सम्मान का जिम्मा ले रहा है।

5. सिंदूरदान:

  • दिखावट: दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है।

  • अर्थ: सिंदूर सुहाग की निशानी है। इसे लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।

निष्कर्ष:
हमारे हर रीति-रिवाज के पीछे सैकड़ों सालों का ज्ञान और विज्ञान छिपा है। इन रस्मों को समझकर निभाने से हमारा रिश्ता और भी पवित्र और मजबूत हो जाता है।